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इन राज्यों में गेहूं खरीद शुरू 72 घंटे के अंदर खरीद के भुगतान का आदेश

इन राज्यों में गेहूं खरीद शुरू 72 घंटे के अंदर खरीद के भुगतान का आदेश

पंजाब और हरियाणा में 1 अप्रैल से गेहूं की खरीद चालू हो गई है। खरीद के लिए तीनों राज्यों में प्रशासन ने सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। सरकार का कहना है, कि किसानों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत पेश नहीं आने दी जाएगी।

गेहूं की खेती करने वाले किसान भाइयों के लिए खुशखबरी है। गेहूं की सरकारी खरीद अब चालू हो गई है। दरअसल, 1 अप्रैल से हरियाणा और पंजाब में गेहूं की खरीद शुरू हो गई है। 

गेहूं की खरीद के लिए दोनों राज्यों में प्रशासन ने सभी इंतजाम पूरे कर लिए हैं। सरकार का कहना है कि किसानों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत पेश नहीं आने दी जाएगी। तीनों राज्यों में सरकार ने क्या-कुछ व्यवस्था कर रखी है।

हरियाणा राज्य में सैकड़ों क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं

अगर हरियाणा की बात की जाए तो सरकार ने प्रदेश भर में गेहूं की खरीद के लिए 414 क्रय केंद्र खोले हैं। बाजार समिति के अधिकारियों का कहना है, कि उन्होंने गेहूं खरीद के लिए पूरी तैयारियां कर ली हैं। 

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा खरीदे गए स्टॉक को मंडियों से गोदामों तक पहुंचाने के लिए टेंडर्स भी जारी कर दिए हैं। खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के निदेशालय ने कहा कि कुल 414 खरीद केंद्रों में से सर्वाधिक 63 सिरसा जनपद में स्थापित किए गए हैं। 

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इसके पश्चात फतेहाबाद में 51 क्रय केंद्र खोले गए हैं। कैथल और जींद जनपदों में क्रमशः 43 और 41 खरीद केंद्र तैयार किए गए हैं।

किसानों को 72 घंटे में एमएसपी का भुगतान सुनिश्चित होगा

बतादें, कि इस बार बीते साल की तुलना में गेहूं की अधिक आवक आने की संभावना है, जिसको देखते हुए फसलों की खरीद की बेहतरीन व्यवस्था की गई है। 

इस बार भी फसल खरीद का भुगतान इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से 48 से 72 घंटे के अंदर-अंदर सीधे कृषकों के खातों में भेजा जाएगा। सरकार ने खरीद के संबंध में सभी चीजों का ब्यौरा द‍िया है। 

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ सुमिता मिश्रा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) के साथ खरीद की तैयारियों के संबंध में बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।

पंजाब में गेंहू खरीद के लिए विशेष इंतजाम

हम यदि पंजाब की बात करें तो यहां भी आज से खरीद प्रारंभ हो चुकी है। मंडी बोर्ड ने गेहूं की खरीद के लिए अपनी तैयारियां पूर्ण कर ली हैं। खरीद का कार्य 45 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 

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पंजाब मंडी बोर्ड ने ऐलान किया है, कि खरीद एजेंसियों की सलाह के मुताबिक विभिन्न एजेंसियों को 1,908 खरीद केंद्र आवंटित किए जाएंगे। 

मुख्य सचिव ने डीसी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है, कि खरीद के दौरान किसानों को किसी तरह की दिक्कत-परेशानी का सामना ना करना पड़े। इसके साथ ही उन्होंने किसानों को परेशानी मुक्त तरीके से शीघ्र भुगतान करने के भी निर्देश दिए हैं।

फसल की कटाई के बाद भंडारण की सम्पूर्ण जानकारी, जाने यहां

फसल की कटाई के बाद भंडारण की सम्पूर्ण जानकारी, जाने यहां

किसानो द्वारा ज्यादातर फसल का भंडारण घरों में विभिन्न तरीको से किया जाता हैं। फसल की कटाई के बाद उसका भंडारण करना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। फसल का स्टॉक नमी वाली जगहों पर न करें , क्यूंकि नमी की वजह से फसल में दीमक और अन्य बैक्टीरिया जैसे रोगों के लगने की संभावनाएं होती है। फसल का स्टॉक यदि बोरों में किया जाता हैं ,तो नीचे फर्श पर लकड़ी के तख्ते ,या फिर चटाई आदि बिछा दी जाती हैं ताकि फसल सुरक्षित रह सके। 


कटाई के बाद फसल का भण्डारण कैसे करे

फसल की कटाई के बाद किसानो द्वारा कुछ फसल को बीज के लिए और कुछ फसल को अपने उपयोग के लिए स्टोर कर लिया जाता है। किसानो द्वारा जो फसल अपने लिए रखी जाती हैं ,उसका भण्डारण वो ड्रम या अन्य किसी बंद मुँह वाले कंटेनर में करते हैं। ताकि जरुरत पड़ने पर उसका उपभोग किया जा सके।

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फसल का भण्डारण करते समय बरती जाने वाली सावधानियां 

बीज के लिए जो भण्डारण किया जाता हैं , उसमे कीटनाशक का उपयोग किया जाता हैं। ताकि उसे आगे की बुवाई के लिए सुरक्षित रखा जा सके। ज्यादातर किसानो द्वारा फसल का भण्डारण जूट के थैलो या बोरियो में किया जाता है।


 * भण्डारण से पहले फसल को सूर्य की रौशनी में सूखने दे  

फसल की कटाई का काम ज्यादातर मशीनो द्वारा किया जाता  हैं ,जिसकी वजह से फसल में नमी होती हैं। यदि ऐसी ही फसल का भण्डारण किसान द्वारा किया जाता हैं तो फसल के खराब होने के ज्यादा अनुमान रहते है। इसीलिए फसल की कटाई के बाद ,कुछ दिनों के लिए फसल को सूर्य की रौशनी में सूखने दे ,ताकि उसमे नमी न रहे।


 * अनाज को अच्छे से साफ़ कर ले 

फसल की कटाई के वक्त बहुत से दाने टूट जाते हैं या फिर उसमे धूल मिट्टी हो सकती हैं अनावश्यक तिनके आ जाते हैं, जो की फसल की रौनक को कम करते है। फसल को स्टोर करने से पहले उसकी अच्छे से सफाई कर ले ,ताकि फसल को फफूंद जैसी समस्याओं से बचाया जा सके।

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 * फसल का स्टॉक साफ़ बोरों में करें 

कभी भी फसल का भण्डारण पुराने और पहले से इस्तेमाल किये गए बोरों में न करें, क्यूंकि फसल के खराब होने के और रोग लगने की ज्यादा संभावनाएं होती है। यदि किसानो द्वारा पुराने बोरों का उपयोग किया जा रहा हैं तो उन्हें अच्छे से धो लेना चाहिए। ताकि फसल में कोई भी रोग न लगे।


 * स्टॉक की गयी फसल के बोरों को दीवार से सटा कर न रखें

किसानो द्वारा फसल का भण्डारण जिन बोरों में किया जाता हैं उन्हें दीवार से सटा कर न रखें ,क्यूंकि बारिश आदि के मौसम में दीवारों पर सीलन या नमी आ जाती हैं ,जिसकी वजह से फसल पर भी इसका प्रभाव पड सकता हैं।  


 * फसल को कीटों से बचाने के लिए नीम के पाउडर का इस्तेमाल करें 

कभी कभी स्टॉक की गयी फसल में घुन आदि जैसे कीट लग जाते हैं ,जो फसल को अंदर से खोखला कर देते है। इन कीटों से बचने के लिए नीम से बने पाउडर का इस्तेमाल भी किसानो द्वारा किया जाता हैं। जिससे स्टॉक की गयी फसल को सुरक्षित रखा जा सके।


 *  फसल का स्टॉक यदि बोरों में किया जाता हैं ,तो निचे फर्श पर लकड़ी के तख्ते ,या फिर चटाई आदि बिछा दी जाती हैं ताकि फसल सुरक्षित रह सके। भंडारगृह को मैलाथियान के घोल से अच्छे से धो ले 

फसल का भण्डारण करते समय याद रखे , फसल को साफ़ जगह पर ही स्टोर करें। भंडारगृह में फसल का स्टॉक करने से पहले उसे मैलाथियान में पानी मिलाकर उसका घोल बनाकर भंडारगृह को धो दे। इससे फसल के खराब होने की बहुत ही कम सम्भावनाये होती है।

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फसल का स्टॉक करना बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य है। फसलों के सुरक्षित भण्डारण के लिए बहुत सी वैज्ञानिक तकनीके अपनायी जाती हैं। इन तकनीकों की वजह से फसल में लगने वाले फफूंद, कीटों आदि से बचाया जा सकता है। लेकिन कभी कभी लोगों को भण्डारण की सम्पूर्ण जानकारी न होने की वजह से आधी से ज्यादा फसल का नुक्सान हो जाता हैं। 


भण्डारण के दौरान फसल को किस्से संरक्षित रखना चाहिए 

जब किसानो द्वारा फसल का भंडारण किया जाता हैं तो ,फसल को नमी , कीड़ों और चूहों से बचाना चाहिए। फसल में अगर ज्यादा नमी होती हैं तो ये सूक्ष्मजीवों के विकास को बढ़ावा देती है। इसी वजह से भण्डारण करना आवश्यक बताया जाता हैं। ताकि फसल को लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जा सकें। फसलों को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भण्डारण किया जाता हैं। छोटे किसानो द्वारा सिर्फ अपने उपभोग के लिए फसल का उत्पादन किया जाता है, लेकिन बड़े पैमाने पर फसल का उत्पादन सिर्फ विपणन के लिए किया जाता हैं। भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए भण्डारण किया जाता है। फसलों का भण्डारण ज्यादातर प्राकृतिक आपदाओं से  निपटने के लिए भी किया जाता हैं ,जैसे बाढ़ आना ,सूखा पड़ना आदि। फसलों के भंडारण के लिए सही स्थान की व्यवस्था होनी चाहिए। भण्डारण करते समय ध्यान रहे फसल में नमी न हो , नमी की वजह से पूरी फसल खराब हो सकती हैं।